31 जुलाई 2020 - 18:42
इस्राईली मीडिया और राजनैतिक गलियारों की माथापच्ची का एक ही मुद्दा हैं सैयद हसन नसरुल्लाह, अगर उनके ठिकाने को जानता है तो हमला क्यों नहीं करता इस्राईल?

इस समय इस्राईली मीडिया का एक ही काम है और वह हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह के बारे में चर्चा। हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों की एक टीम के सीमा पार करने की अटकलों का बाज़ार गर्म है जबकि हिज़्बुल्लाह ने कहा कि उसने सीमा पर कोई आप्रेशन नहीं किया है।

इस्राईल सीमा के हालात के बार में चार कहानियां सुना रहा है।

एक तो यह कि इस्राईली सैनिकों ने सीमा पर हिज़्बुल्लाह के जवानों की गतिविधियां देख लीं जिसके बाद फ़ायरिंग शुरू हो गई और हिज़्बुल्लाह के लड़ाके अपने ठिकाने की ओर लौट गए।

दूसरा विचार यह है कि हिज़्बुल्लाह के जवानों की गतिविधियों को नोट करने वाले इस्राईली सैनिकों को यह निर्देश दिए गए कि वह हमला न करें बल्कि उन्हें वापस जाने पर मजबूर करें। यह यरुश्लम पोस्ट और दूसरे अख़बारों की रिपोर्ट में दावा किया गया है।

तीसरी कहानी यह है कि इस्राईली सैनिक इंटेलीजेन्स अमान को हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह के छिपने का स्थान पता है। मगर सवाल है कि जब पता है तो इस्राईल अब क्या करना चाहता है?

चौथी कहानी यह है कि हिज़्बुल्लाह ने इस्राईल के मीरकावा टैंक को कोरनेट मिसाइल से ध्वस्त कर दिया मगर इस्राईली नेतृत्व ने इस ख़बर को मीडिया से हटा दिया ताकि इस्राईली सैनिकों का गिरा हुआ मनोबल और भी ध्वस्त न हो जाए।

यह सारी रिपोर्टें सही हों या ग़लत हों पूरी तरह हिज़्बुल्लाह के फ़ायदे में जाती हैं और इनसे साबित होता है कि मनोवैज्ञानिक युद्ध के स्तर पर तो हिज़्बुल्लाह ने लड़ाई जीत ली है।

जहां तक यह बात है कि इस्राईली सैनिकों को उनके नेतृत्व की ओर से आदेश मिला कि हिज़्बुल्लाह के जवानों पर हमले न करें वरना हिज़्बुल्लाह की ओर से और भी बड़ी जवाबी कार्यवाही हो जाएगी तो इसका मतलब यह है कि इस्राईल वाक़ई बेहद कमज़ोर हो गया है और उसकी पूरी कोशिश है कि हिज़्बुल्लाह से कोई टकराव न होने पाए। इसलिए कि उसे पता है कि अगर टकराव हो गया तो सबसे बड़ा नुक़सान उठाने वाला वह ख़ुद होगा।

जहां तक यह बात है कि इस्राईली इंटेलीजेन्स को सैयद हसन नसरुल्लाह के ठिकाने की जानकारी है मगर वह हमला इसलिए नहीं कर रही है कि हिज़्बुल्लाह की ओर से की जाने वाली जवाबी कार्यवाही का उसे डर है तो यह सरासर झूठ है। इस्राईलियों के इस प्रकार के झूठ हम शुरू से सुनते आ रहे हैं। इस्राईल सैयद अब्बास मूसवी और एमाद मुग़निया सहित हिज़्बुल्लाह के किसी भी नेता की हत्या का मौक़ा हाथ से जाने नहीं देता।

इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद के पूर्व प्रमुख दानी यातोम ने सही कहा कि उन्हें यह डर है कि शायद इस्राईल हिज़्बुल्लाह के सामने हमले की ताक़त खो चुका है वरना सीमा पर भीतर घुसने की कोशिश करने वाले हिज़्बुल्लाह के जवानों को वह ज़रूर क़त्ल कर देता मगर उसने भयानक परिणाम के डर से यह काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस समय सैयद नसरुल्लाह अपने आवास में आराम से बैठकर इस्राईल के भीतर के संकटमय हालात देख रहे होंगे और आनंद उठा रहे होंगे।

हिज़्बुल्लाह के कमांडर अली कामिल मोहसिन की शहादत के बाद इस्राईल ने अपनी सेना को हाई एलर्ट कर दिया है क्योंकि इस्राईली सैनिक और राजनैतिक नेतृत्व को पूरा यक़ीन है कि सैयद हसन नसरुल्लाह अपनी धमकी पर अमल ज़रूर करेंगे अलबत्ता वह अपना काम बहुत संयम से करते हैं। इस समय हिज़्बुल्लाह की ओर से जो ख़ामोशी है उसने इस्राईलियों की आंख से नींद छीन ली है और यह स्थिति इस्राईलियों के लिए बड़ी तकलीफ़देह है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार